Bandhavgarh National Park: कान्हा नेशनल पार्क से बांधवगढ़ आए 11 और बारहसिंघा, अभी बाड़े में रहेंगे


Kanha National Park Barasingha कान्हा से 11 वन्यजीवों की एक और खेप ताला पहुंची। कान्हा से कुल 50 बारहसिघों को लाया जाना था। इसी के तहत मार्च तथा मई 2024 मे दो चरणों मे 37 बारहसिंघों को बांधवगढ़ लाया गया।

By Neeraj Pandey

Publish Date: Tue, 13 Feb 2024 11:52 PM (IST)

Updated Date: Tue, 13 Feb 2024 11:52 PM (IST)

Bandhavgarh National Park: कान्हा नेशनल पार्क से बांधवगढ़ आए 11 और बारहसिंघा, अभी बाड़े में रहेंगे
कान्हा से बांधवगढ़ नेशनल पार्क आए 11 बारहसिंघा

HighLights

  1. कान्हा से बांधवगढ़ नेशनल पार्क आए 11 बारहसिंघा
  2. अभी कई चरणों मे बारहसिंघों को लाया जाना है
  3. कान्हा से कुल 50 बारहसिघों को लाया जाना था।

उमरिया। राष्ट्रीय उद्यान में बांधवगढ़ प्रोजेक्ट बारहसिंघा के तहत को मंगलवार को कान्हा से 11 वन्यजीवों की एक और खेप ताला पहुंची। इनमे 3 नर और 8 मादा बारहसिंघा हैं। नये मेंहमानो को भी नेशनल पार्क के मगधी रेंज में बनाये गये बाड़े मे रखा गया है। उद्यान के उप संचालक पीके वर्मा ने बताया है कि इनकी संख्या 100 या उससे अधिक होने पर ही खुले जंगल मे छोड़ा जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि वन्यजीवों को मंडला जिले के कान्हा टाईगर रिजर्व से विशेष वाहन द्वारा रवाना किया गया। उनके साथ विभाग के वन्यजीव चिकित्सक, अधिकारियों तथा कर्मचारियों का दल भी तैनात था। बांधवगढ़ मे बड़ी ही सावधानी के साथ उन्हे सफलतापूर्णक उतार लिया गया।

पहले आए दो बार

बांधवगढ़ नेशनल पार्क मे बारहसिंघों को संस्थापित करने के परियोजना की कार्रवाई काफी दिनो से चल रही थी। इसके लिये शासन द्वारा कई स्तरों पर परीक्षण कराया गया। उद्यान की आबोहवा नये वन्यजीवों के अनुकूल पाये जाने के उपरांत इसकी अनुमति प्रदान की गई। जिसके मुताबिक वर्ष भर मे कान्हा से कुल 50 बारहसिघों को लाया जाना था। इसी के तहत मार्च तथा मई 2024 मे दो चरणों मे 37 बारहसिंघों को बांधवगढ़ लाया गया। इस दौरान दो बारहसिंघों का जन्म भी हुआ। गत दिवस लाये गये 11 को मिला कर बांधवगढ़ मे अब बारहसिघों की तादाद बढ़ कर 51 हो गई है। सभी बारहसिघों को मगधी के बाड़े मे रखा गया है।

सितंबर में प्रजनन

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक बारहसिघों का मेटिंग काल दिसंबर से जनवरी तक होता है। जिसके 6 माह बाद अर्थात सिंतबर के आसपास मादायें बच्चों को जन्म देती हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क के उप संचालक पीके वर्मा ने बताया कि जब तक इनकी संख्या 100 या इससे अधिक नहीं हो जाती, तब तक उन्हे खुले जंगलों मे नहीं छोड़ा जायेगा। उन्होने कहा कि अधिकांशत: बारहसिंघे झुण्ड मे विचरण करते हैं। संख्या अधिक होने के बाद इनकी वंश वृद्धि तेजी के सांथ तथा आसानी से हो सकेगी।

naidunia_image

और होगा आगमन

पार्क प्रबंधन ने बताया कि बांधवगढ़ मे अभी कई चरणों मे बारहसिंघों को लाया जाना है। इसके लिये वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम उद्यान मे उनके भोजन, पानी और अन्य सभी पहलुओं का सर्वे करेगी। विशेषज्ञों की संतुष्टि तथा सकारात्मक रिपेार्ट के बाद शासन की अनुमति मिलने पर ही इस संबंध मे आगे की कार्यवाही संचालित की जायेगी। गौरतलब है कि बारहसिंघे अमूमन तालाबों के उथले पानी मे उगने वाली हाईड्रेला तथा सेक्रम नामक घास का सेवन करते हैं। अन्य पहलुओं के अलावा विशेषज्ञों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बांधवगढ़ मे बारहसिंघों के लिये पर्याप्त आहार उपलब्ध हो।

  • ABOUT THE AUTHOR

    पत्रकारिता के क्षेत्र में डेस्क और ग्राउंड पर 4 सालों से काम कर रहे हैं। अगस्त 2023 से नईदुनिया की डिजिटल टीम में बतौर सब एडिटर जुड़े हैं। इससे पहले ETV Bharat में एक साल कार्य किया। लोकसभा और उत्तर प्रदेश, मध्



Source link

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.