Crime File Indore: नेताओं की एफआइआर में पुलिस अफसर फंसे


Crime File Indore: नेता पुत्र-भाइयों के विरुद्ध साक्ष्य जुटाना छोड़कर अब केस से कैसे निकालें, इसका तोड़ ढूंढने लगे।

Publish Date: Mon, 04 Dec 2023 01:55 PM (IST)

Updated Date: Mon, 04 Dec 2023 01:55 PM (IST)

Crime File Indore: नेताओं की एफआइआर में पुलिस अफसर फंसे
नेताओं की एफआइआर में पुलिस अफसर फंसे

Crime File Indore: क्राइम फाइल, मुकेश मंगल

चुनावी दौर में हुए झगड़े पुलिस अफसरों की मुसीबत बन गए हैं। कुछ प्रकरण न बंद हो सकते हैं, न उनमें गिरफ्तारी हो सकती है। जोन-4 के रावजी बाजार, जूनी इंदौर और भंवरकुआं थाना में कांग्रेस-भाजपा नेताओं ने एक-दूसरे पर केस दर्ज करवाए थे। जूनी इंदौर में विधायक मालिनी गौड़ के बेटे एकलव्य और भंवरकुआं में विधायक मधु वर्मा के भाई बलराम वर्मा को गंभीर धाराओं में मुलजिम बना दिया। अफसरों ने तीनों प्रकरणों में टीम बनाई और कहा कि विवाद के फोटो, वीडियो और साक्षियों के कथन एकत्र कर गिरफ्तारी के साक्ष्य जुटा लें। सोचा था कि सरकार बदली तो गिरफ्तार कर लेंगे। किंतु रविवार को आए परिणामों से दांव उलटा पड़ गया। गिरफ्तारी और चालान की तैयारी कर रहे अफसरों ने जांच से हाथ खींच लिए। नेता पुत्र-भाइयों के विरुद्ध साक्ष्य जुटाना छोड़कर अब केस से कैसे निकालें, इसका तोड़ ढूंढने लगे।

दद्दा की हार से मायूस पुलिस अफसर

दद्दा यानी डा. नरोत्तम मिश्रा की हार से शहर में पदस्थ पुलिस अफसर भी मायूस हैं। जिन पुलिस अफसरों की ड्यूटी मतगणना स्थल पर थी, उनकी नजरें दतिया विधानसभा चुनाव परिणाम पर भी लगी हुई थी। सबसे ज्यादा झटका निरीक्षकों को लगा है। शहर के ए और बी ग्रेड के थानों में दद्दा की पोस्टिंग है और टीआइ सीधे उनके संपर्क में हैं। जिनकी सी ग्रेड के थानों में पोस्टिंग हुई, वो चुनाव बाद नई पोस्टिंग का आश्वासन लेकर बैठे हुए थे। आइपीएस भी नए जिले में पोस्टिंग की जुगाड़ लगा चुके थे। दोपहर बाद जैसे ही दद्दा के पिछड़ने की खबर आई, सब एक-दूसरे को फोन लगाने लगे। शाम को स्पष्ट हो गया कि दद्दा ने हार स्वीकार कर ली है। घोषणा के साथ ही अफसरों ने भी अब नया ठीया तलाशना शुरू कर दिया है। नए विधायकों से मिलने के लिए समर्थकों से बात भी कर ली है।

लोकायुक्त और पंचायत पर भारी सरपंच

विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) ने जिस सरंपच को रिश्वत कांड में पकड़ा, उसे तीन महीने पूर्व भी नहीं हटा सकी थी। लोकायुक्त द्वारा भेजा पत्र भी जिला पंचायत और एसडीओ कार्यालय से गायब हो गया। ग्राम पंचायत सिंहासा के सरपंच नारायण चौहान को लोकायुक्त ने 4 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। मछली पालन केंद्र चलाने के एवज में 80 हजार रुपये मांग रहे नारायण पर भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज किया और पद से हटाने के लिए जिला पंचायत सीईओ को पूरी रिपोर्ट भेज दी। एफआइआर के साथ भेजे पत्र में पद से हटाने की सिफारिश की गई। जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 27 अक्टूबर को लोकायुक्त की एफआइआर और पत्र मल्हारगंज अनुभाग के अनुविभागीय अधिकारी को भेजा, मगर इसके बाद सारे पत्र दबा दिए। कमाल की बात यह कि एफआइआर के बाद बड़े अधिकारियों को पद से हटा देने वाली लोकायुक्त पुलिस भी इस मुद्दे पर खामोश रही।

काल सेंटर कांड में क्राइम ब्रांच व पुलिस आमने-सामने

डाटा एंट्री-वर्क फ्राम होम की आड़ में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह को लेकर अपराध शाखा और भंवरकुआं पुलिस आमने-सामने हैं। अपराध शाखा की कस्टडी में बैठे मुलजिम ने जबसे थाने के एसआइ का नाम कुबूला है, पुलिसकर्मी लामबंद हो गए हैं। 60 फीट रोड निवासी मृदुल नवलखा क्षेत्र में फर्जी काल सेंटर चलाते हुए पकड़ा गया था। भंवरकुआं पुलिस ने मुंबई पुलिस के साथ मिलकर मृदुल से लाखों रुपये ले लिए। डीसीपी (अपराध) निमिष अग्रवाल ने मृदुल को पकड़ा, तो उसने तोते की तरह थाने वालों के किस्से बता दिए। जालसाजों से साठगांठ की खबर सुनते ही डीसीपी ने एसीपी सौम्या अग्रवाल को जांच सौंप दी। अपराध शाखा के सक्रिय होते ही जोन-4 के पुलिसकर्मियों ने खबर चलाई कि पुलिसवालों को दबाने की तरकीब है। शराब कांड में आरोपितों को न छोड़ने पर अपराध शाखा थाने वालों की साख पर बट्टा लगा रही है।



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