MP Vidhan Sabha: मध्य प्रदेश की 96 सड़कों पर टोल से वसूले 7,571 करोड़ रुपये


MP Vidhan Sabha: कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्यक्ष और प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के उत्तर में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया।

By Prashant Pandey

Publish Date: Tue, 13 Feb 2024 07:12 PM (IST)

Updated Date: Tue, 13 Feb 2024 07:20 PM (IST)

MP Vidhan Sabha: मध्य प्रदेश की 96 सड़कों पर टोल से वसूले 7,571 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश की सड़कों पर टोल टैक्स।

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में इन्हीं सड़कों पर दुर्घटनाओं में 6,953 की हुई मौत।
  2. कई सड़कों की लागत से अधिक की वसूली टोल टैक्स से हो चुकी है।
  3. भोपाल, सीहोर, देवास मार्ग की लागत 426 करोड़ रुपये थे और वसूली एक हजार करोड़ से ज्यादा।

MP Vidhan Sabha: नवदुनिया राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश की 96 सड़कों पर टोल टैक्स से अब तक 7,571 करोड़ रुपये का टोल टैक्स वसूला गया है। कई सड़कों की लागत से अधिक की वसूली टोल टैक्स से हो चुकी है। इन सड़कों पर 22 हजार 797 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 23 हजार714 लोग घायल हुए तो 6,953 की मृत्यु हुई। यह जानकारी लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने पंकज उपाध्याय और प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के उत्तर में दी।

प्रश्नकाल में टोल टैक्स की वसूली का मुद्दा विधायक पंकज उपाध्याय ने उठाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से वसूली हो रही है, उससे लगता है कि सरकार जनता के लिए नहीं है कि ठेकेदारों के लिए है। भोपाल, सीहोर, देवास मार्ग की लागत 426 करोड़ रुपये थे और अब तक एक हजार 342 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके हैं। इस मार्ग पर दुर्घटनाओं में 281 लोगों की मृत्यु हुई। ऐसे ही लेबड़ जावरा मार्ग की लागत 426 करोड़ थी और एक हजार 826 करोड़ रुपये की वसूली हुई है।

इस मार्ग पर दुर्घटना में 323 लोगों का निधन हुआ। जावरा-नया गांव मार्ग की लागत 425 करोड़ रुपये थी और दो हजार 69 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। यहां दुर्घटनाओं में 444 लोगों की मृत्यु हुई है। इसके बाद भी न तो ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई की गई और यदि निर्माण दोषपूर्ण है तो अधिकारियों के विरुद्ध कोई ही कोई कदम उठाया गया।

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प्रतिवर्ष 10 से 15 प्रतिशत टोल राशि भी बढ़ाई जा रही है जो समझ से परे है। दिनेश गुर्जर ने कहा कि जब किसी भी ठेके की निविदा निकाली जाती है तो उसमें सारा खर्च जोड़ा जाता है। लागत पूरी हो जाती है, उसके बाद टोल टैक्स की समयावधि खत्म होने के बाद उसे हटा लिया जाता है पर कई जगह अवधि बढ़ा दी गई।

इस पर विभागीय मंत्री ने कहा कि अनुबंध एक समय विशेष के लिए होता है। उसमें टोल भी शामिल रहता है। जहां तक बात दुर्घटनाओं की है तो इसके लिए ठेकेदार सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं होता है। यदि उस सड़क गड्ढे हों या फिर संधारण कार्य के कारण दुर्घटनाएं होती है तो फिर उसकी जिम्मेदारी अवश्य ठेकेदार की होती है।

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    नईदुनिया डॉट कॉम इंदौर में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ डेस्क पर वरिष्ठ उप-संपादक। पत्रकारिता और जनसंचार में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से बैचलर और विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से मास्टर्स डिग्री। इंदौर में 2014



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